1st Choice of Indian Politicians

हिन्‍दी साप्‍ताहिक समाचार पत्र

Hindi Weekly News Paper of India

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नव वर्ष 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं

 

भारतीय लोकतंत्र बचाने की चिंता

     ‘न्यूयार्क टाइम्स’ में छपी रिपोर्ट के बाद दुनियां भर में भारतीय लोकतंत्र को बचाने की चिंता हो गई है। इस अंतरराष्ट्रीय अखबार के पहले पन्ने पर छपी रिपोर्ट में जो कहा गया है वह भारत के ही नहीं, दुनियां भर के लोकतांत्रिक राष्ट्रों के लिए प्रश्न खड़ा कर रही है। इस रिपोर्ट में प्रमुख बात यह लिखी गई है कि अब यदि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पद से हट भी जाते हैं तो भी भारतीय लोकतंत्र की दशा सुधरने वाली नहीं है। आरएसएस और नरेन्द्र मोदी ने पूरे तंत्र पर इस प्रकार कब्जा कर लिया है कि अब भारत इससे छूट नहीं सकता है। इस रिपोर्ट को भारत में भी लाखों लोगों ने पढ़ा है और इसे लेकर एक जबरदस्त बहस भी देश भर में छिड़ गई है। इस रिपोर्ट को भारत में देशवासियों की आंखें खोलने वाला बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि आरएसएस भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने के सपने को पूरा करने के लिए आगे बढ़ गई है। उसने अपने संगठन के जरिए पूरे तंत्र पर कब्जा जमा लिया है। इस रिपोर्ट में जहां उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रधानमंत्री बनने का भी जिक्र है वहीं देश की विपक्षी पार्टियों को काफी कमजोर बताया गया है जो मौजूदा संकट में कुछ करने में सक्षम नहीं है। इसके अतिरिक्त इसमें काफी विस्तार से भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था का बखान किया गया है।     जारी...

 

फिल्‍मों में आने से पहले ज्‍यादा हेंडसम थे धर्मू

प्रस्‍तुति : संजय हिंदवान

     वर्ष 2025 भारत के सिनेमा जगत के लिए काफी दुखद रहा। इस वर्ष में भारतीय सिनेमा का सबसे स्मार्ट हीरो धर्मेन्द्र देयोल को हमने खो दिया। उन्हें श्रद्धांजलि स्वरूप हम यह लेख आम लोगों के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं। इस लेख में उनसे जुड़ी वह यादें हैं जो शायद कभी सिनेमा प्रेमियों के सामने नहीं आई हैं। बात वर्ष 1954 की है जब धर्मेन्द्र मलेरकोटला में एक टयूबवैल कंपनी में काम करते थे। इस कंपनी का नाम ‘हैरल्ड स्मिथ’ था जिसे पंजाब में हरित क्रांति लाने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू से ठेका दिया था। धर्मेन्द्र तब इस कंपनी में मेरे पिता स्वर्गीय रास बिहारी शर्मा के साथ टयूब्वैल लगाने और उसकी जांच करने का काम किया करते थे। ड्यूटी के बाद दोस्तों में फिल्मी बातें होती थी। यहां उनकी उस टायरी का एक पन्ना प्रस्तुत कर रहा हूं।        .जारी..

 

मस्‍क के सामने अडानी अंबानी कहीं नहीं टिकते

     प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मित्रता करके भी भारत के उद्योगपति मुकेश अंबानी और गौतम अडानी अमेरिका के एलन मस्क के नजदीक भी नहीं फटक पा रहे हैं। जबकि मस्क अमेरिका के प्रेजिडेंट डोनाल्ड ट्रंप को आंखें दिखाते हुए बुलंदियों को छू रहे हैं। दुनियां के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क की संपत्ति 600 बिलियन डालर (54.60 लाख करोड़ रुपए) को पार कर गई है। एलन मस्क नेटवर्थ का यह आंकड़ा छूने वाले दुनियां के पहले व्यक्ति बन गए हैं। इससे पहले पहली अक्तूबर को मस्क की संपत्ति 500 बिलियन डालर (45.50 लाख करोड़ रुपए) पर पहुंची थी। स्पेसएक्स की 800 बिलियन डालर (72.80 लाख करोड़) का वैल्यूएशन और आईपीओ आने की खबर के बाद मस्क की संपत्ति में एक ही दिन में लगभग 168 बिलियन डालर (15 लाख करोड़) की बढ़ोतरी हुई। यह भारत के दो सबसे अमीर धनकुबेरों मुकेश अंबानी और गौतम अडानी की कुल संपत्ति 16 लाख करोड़ के करीब है। स्पेसएक्स के अलावा मस्क की ईवी कंपनी टेस्ला में भी उनकी लगभग 12 फीसदी हिस्सेदारी है। 2025 में अब तक टेस्ला के शेयर 13 फीसदी चढ़ चुके हैं। पिछले दिनों भी टेस्ला के शेयर करीब चार फीसदी ऊपर थे जब मस्क ने कहा कि कंपनी फ्रंट पैसेंजर सीट पर बिना सेफ्टी मॉनिटर के रोबोटैक्सी का परीक्षण कर रही है।      जारी...

 

बर्फ गिरने की आस में पर्यटक और पर्यटन व्‍यापारी

     हिमाचल में नव वर्ष के शुरू होते हैं बर्फबारी की आस पर्यटकों के साथ पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों में भी हो जाती है। नव वर्ष के दिन अगर शिमला और मनाली में बर्फबारी के दर्शन हो जाते हैं तो पूरे क्षेत्र की बांछें खिल उठती हैं। माना जाता है कि नव वर्ष के शुरू के सप्ताह में भी पहाड़ों पर बर्फ गिर जाती है तो शीतकालीन पर्यटन को सफल माना जाता है। नए साल का जश्न मनाने के लिए हिमाचल प्रदेश के विभिन्न पर्यटन स्थल सैलानियों से लबालब भर गए हैं। इस एक जनवरी को पूरी तरह से बर्फबारी का माळौल बना रहा। हलांकि क्रिसमस के मौके पर ही हिमाचल के पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों का खूब जमावड़ा लगा और नव वर्ष के आगे भी बर्फबारी की आस में यह पर्यटकों का तांता और बढ़ता गया। इससे हिमाचल का पर्यटन कारोबार खूब चमक रहा है। नए साल का जश्न पर्यटकों ने पहले से ही मनाना शुरू कर दिया था। अभी भी लोग होटलों में कमरों की बुकिंग कर रहे हैं। पर्यटन कारोबारियों से मिल रही रिपोर्ट के अनुसार 80 फीसदी तक होटलों की कमरों की बुकिंग हो चुकी है और यह बुकिंग तब तक जारी रहेगी जब तक हिमाचल के पहाड़ बर्फ की चादर से न ढक जाएं।          जारी...

 

प्रियंका गांधी ने हिमाचल के सांसदों को पीछे छोड...

     परवाणू से शिमला जाने वाले फोरलेन से सोलन के लोग कई वर्षों से जूझ रहे हैं। इसका ज्यादा हिस्सा सोलन जिला से ही गुजरता है। अब प्रियंका गांधी ने हिमाचल के सभी सांसदों को पीछे छोड़ते हुए शिमला को देश के दूसरे राज्यों से जोड़ने वाले चंडीगढ़-शिमला फोरलेन का मामला संसद में छेड़ दिया। यह मामला हिमाचल के किसी सांसद ने नहीं बल्कि केरल के वायनाड से सांसद एवं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने लोकसभा में इस राष्ट्रीय राजमार्ग की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताई। प्रियंका गांधी ने कहा कि चंडीगढ़-शिमला फोरलेन के कई हिस्सों में रिटेनिंग वॉल (सुरक्षा दीवारें) बेहद कम ऊंचाई की बनाई जा रही हैं, जिसके कारण इन स्थानों पर लैंडस्लाइड की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। प्रियंका के इस सवाल से लोकसभा में हिमाचल के चारों सांसदों को सांप सूंघ गया और वह कुछ नहीं बोल सके। शिमला के सांसद सुरेश कश्यप तो दिन रात इस मार्ग पर अपनी गाड़ी दौड़ाते चले आ रहे हैं। उन्होंने भी कभी इस ओर सड़क परिवहन मंत्री का ध्यान नहीं दिलाया। जबकि प्रियंका गांधी ने इस ओर केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों का ध्यान आकर्षित करते हुए तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग लोकसभा में कर दी। प्रियंका ने सदन में मौजूद मंत्री नितिन गडकरी से अप्वाइंटमेंट की मांग भी कर डाली।      जारी...

 

भारत के संविधान पर बात करना पाप हो गया है भारत में

     ऐसा महसूस होने लगा है कि भारत के संविधान पर बात करना भारत वर्ष में ही पाप हो गया है। हलांकि भारत के संविधान को चारों ओर से सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी भारत के संविधान में ही सबसे पहले भारत के राष्ट्रपति को उसकी शपथ में ही दी गई है। उसके बाद सुप्रीम कोर्ट को भारत के संविधान का संरक्षक बनाया गया है। फिर तंत्र में कार्य कर रही संसद और राज्य विधानसभाएं भी भारत के संविधान को मजबूत करने के लिए अपने कार्य करती है। लेकिन जिस प्रकार की खबरें भारत वर्ष से आ रही हैं उसे देखकर तो लगने लगा है कि भारत में ही भारत के संविधान की सुरक्षा की बात करना कोई पाप या गुनाह हो गया है। भारत का संविधान, भारत का गणतंत्र या लोकतंत्र हम भारत के लोगों से शुरू होता है। इसके लिए संविधान में यह व्यवस्था दी गई है कि देश के नागरिक को वोट डालने का अधिकार होगा और वह अपने मत से लोकसभा का गठन करेगा, जिसमें से भारत सरकार का जन्म होगा। इसी प्रकार वोटर अपने वोट कर इस्तेमाल करके राज्य विधानसभाओं का गठन करेगा। इसके लिए भारत के संविधान ने भारत के चुनाव आयोग का गठन किया। चुनाव आयोग को ही यह जिम्मेदारी दी गई कि वह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव देश भर में करवाएगा और जनमत से तैयार की गई सरकारों का गठन भी करवाएगा। पिछले दिनों जिस प्रकार के आरोप भारत के चुनाव आयोग पर लगे है।       जारी...

 

मुश्किल दौर में सुप्रीम कोर्ट सहारा बना सेब बागवानों का

     वन भूमि पर कब्जाकर लगाए गए सेब के बगीचे अब सुरक्षित रह पाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के उस फैसले को पलटते हुए कहा कि पर्यावरण की दृष्टि से भी सेब के बगीचों को काटे जाने का आदेश दिया जाना गलत था। हाई कोर्ट के फैसले के बाद शिमला जिला में हजारों फलदार वृक्षों को उस समय काट दिया गया जब उसमें सेब लबालब लगे हुए थे। किसान इस बात से बहुत व्यथित थे और आंसू बहा रहे थे। हाई कोर्ट के फैसले के बाद प्रदेश के कामरेडों ने इस मामले को लेकर संघर्ष भी छेड़ दिया था। आखिरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंचकर इस मामले में बागवानों को राहत मिल सकी। सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें वन भूमि पर कथित अतिक्रमण वाले इलाकों से फलदार बगीचों को हटाने का निर्देश दिया गया था। इस फैसले से प्रदेश के लाखों सेब उत्पादकों को राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस सूर्यकांत और जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट ने ऐसा आदेश पारित कर गंभीर भूल की है जिसके बहुत व्यापक और कठोर परिणाम हो सकते थे। पीठ ने कहा कि यह आदेश समाज के हाशिये पर खड़े वर्गों और भूमिहीन लोगों को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि फलदार पेड़ों की कटाई से जुड़ा यह मुद्दा नीतिगत दायरे में आता है और न्यायालय को ऐसे मामलों में अत्यधिक हस्तक्षेप से बचना चाहिए। सेब उत्पादक संघ के सचिव संजय चौहान ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि जब तक आपदा प्रभावित, गरीब परिवारों और किसानों को 5 बीघा जमीन नहीं मुहैया करवाई जाती, तब तक सेब उत्पादक संघ संघर्षशील रहेगा। जारी...

 

गांधी का नाम हटा राम का नाम जोड़ा गया

     मनरेगा को लेकर विपक्षी दलों ने संसद से लेकर बाहर तक इस इसके नाम को बदले जाने पर कड़ी आपत्ति दर्ज की है। मोदी सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) की जगह ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ (विकसित भारत-जी राम जी) विधेयक, 2025 को लोकसभा में पेश कर दिया है। विपक्षी सदस्यों ने मनरेगा के स्थान पर इस विधेयक को लाए जाने का विरोध करते हुए कहा कि सरकार अधिनियम के नाम से महात्मा गांधी का नाम हटाना चाहती है इसलिए यह विधेयक लाया जा रहा है। उनका कहना था कि मनरेगा में गरीब ग्रामीणों को रोजगार मिल रहा है। इस बिल को पेश करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि महात्मा गांधी हमारे दिलों में बसते हैं। हम केवल महात्मा गांधी को मानते ही नहीं उनके विचारों पर आधारित सरकार कई गरीब कल्याण की कई योजनाएं चला रही है। मनरेगा पर हमारी सरकार ने गरीबों पर पहले से अधिक खर्च किया है। अब 125 दिन की गारंटी दी जाएगी पहले 100 दिन की थी। इस बिल की आलोचना प्रियंका गांधी से लेकर शशि थरूर तक ने की। विरोध करने वालों ने महात्मा गांधी का नाम इस योजना से हटाने को लेकर कड़ा विरोध दर्ज किया। इस पर केंद्रीय कृषि मंत्री ने सफाई देते हुए कहा कि विपक्ष राम के नाम से क्यों भड़क रहा है। गरीब का कल्याण, इसमें उसी संकल्प को पूरा करने का काम किया जाएगा। इसके प्रावधान में एक विकसित गांव का लक्ष्य है जो गरीबों के कल्याण के लिए है। महात्मा गांधी ही राम राज्य चाहते थे। नेता विपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि मनरेगा को खत्म करने की कोशिश महात्मा गांधी के विचारों का सीधा अपमान है।     जारी...

 

संपाकीय          किसान व्‍यापारी नहीं है

     भारत वर्ष में किसानों की आत्महत्या करने पर पूरा देश पिछले कई वर्षों से गहन चिंतन कर रहा है। लेकिन किसानों की आत्महत्या करने का दौर रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है। इसके जड़मूल में अध्ययन करने पर यही बात समझ में आती है कि किसानों का आत्महत्या करने का सबसे बड़ा कारण उसकी सोच में आई वाणिज्य प्रवृति है। अब वह कर्ज लेकर फसल उगाते हैं। इससे भारत का किसान भी अपरोक्ष रूप से किसी उद्योग में काम करने वाला मजदूर हो गया है। जिसके हिस्से में मुनाफा तो कम ही आता है लेकिन हानि पूरी तरह से उसके हिस्से में आ जाती है जो उसे आत्महत्या करने पर विवश कर रही है। किसानों को एक बार फिर अपने पुराने रूप में आने की जरूरत है।
     देश के लाखों किसान आत्महत्या कर चुके हैं। हैरानी की बात यह है कि किसान भुखमरी, गरीबी और कर्ज के कारण आत्महत्या कर रहे हैं। यहां गौर करने लायक बात यह है कि हिमाचल और उत्तराखंड के किसान भारी गरीबी होने के बावजूद आत्महत्या नहीं कर रहे हैं। देश भर के किसानों को हिमाचल और उत्तराखंड के किसानों से बड़ा सबक सीखना चाहिए। आत्महत्या करने और आत्महत्या न करने वाले प्रांतों के किसानों में सबसे बड़ा अंतर यही महसूस किया जा रहा है कि जिन प्रांतों के किसानों ने अपनी पुरानी परंपराओं की जीवित रखा है उन्हें कभी भी आत्महत्या करने जैसी बात को सोचने की जरूरत ही नहीं पड़ती है। वह भंयकर अकाल में भी खुद को और अपने आसपास के लोगों को जिंदा रखने की ताकत रखते हैं।
  ....जारी

 

सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने फैसले पर रोक लगाई

     अरावली पहाड़ियों को लेकर उठे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर के अपने ही फैसले पर रोक लगा दी है। उक्त फैसले के तहत शीर्ष कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों व पर्वत श्रृंखलाओं की एकसमान परिभाषा को स्वीकार किया था। इसके तहत अरावली के विस्तार वाले जिलों में उसी भू-संरचना को अरावली पहाड़ी माना जाएगा, जिसकी ऊंचाई आसपास की जमीन से 100 मीटर हो। इस परिभाषा से छोटी पहाड़ियों पर खनन की अनुमति मिलने का खतरा था, मगर शीर्ष कोर्ट के नए आदेश के बाद इस पर रोक लग जाएगी। सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने इस मुद्दे की समग्र जांच के लिए विशेषज्ञों की उच्च शक्ति वाली समिति गठित करने का प्रस्ताव दिया। समिति उन क्षेत्रों की विस्तृत पहचान भी करेगी, जिन्हें अरावली क्षेत्र से बाहर रखा जाएगा। यह आकलन भी किया जाएगा कि क्या इन्हें बाहर रखने से अरावली की पारिस्थितिक अखंडता को नुकसान हो सकता है। अरावली की बदली हुई परिभाषा से जुड़े मुद्दों पर स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई के दौरान पीठ ने नई परिभाषा स्पष्ट करने की जरूरत पर जोर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अरावली की परिभाषा को लेकर फैली असहमति और आलोचना शीर्ष अदालत की ओर से जारी कुछ शब्दों व निर्देशों में स्पष्टता की कमी से उपजी प्रतीत होती हैं।      जारी...

 

आईजीएमसी कांड चाय के प्‍याले में तूफान

     इंदिरा गांधी मेडिकल कालेज (आईजीएमसी) शिमला में पिछले दिनों एक मरीज के साथ डाक्टर की मारपीट कांड चाय के प्याले में तूफान की तरह हुआ। इसका एक वीडियों भी सोशल मीडिया में वायरल हुआ जिसमें दो डाक्टर मरीज को दबोच रहे हैं और एक डाक्टर मरीज पर मुक्कों की बौछार कर रहा था। इसमें मरीज के नाक से खून भी निकल आया। बड़े बवाल के बाद दोनों पक्षें में समझौता करवाकर मामले को सरकार ने शांत करवा दिया है। कुपवी के इस युवा का वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया में जारी हुआ वैसे ही वहां अन्य युवा भी एकत्र हो गए और उन्होंने डाक्टर की मारपीट का विरोध दर्ज करवाना शुरू कर दिया। मामले की पुलिस में शिकायत दर्ज कर ली गई थी। लेकिन वहां एकत्र लोग इस कार्यवाही से संतुष्ट नहीं थे। वह डाक्टर को बर्खास्त करने की मांग पर अड़े हुए थे। सरकार ने भी अपनी जांच के बाद डाक्टर को बर्खास्त कर दिया। इस बर्खास्तगी के विरोध में प्रदेश के डाक्टर हड़ताल पर चले गए और माहौल और तनाव पूर्ण हो गया था। इसके बाद डाक्टर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधि मुख्यमंत्री से मिले, मुख्यमंत्री ने भी इस मामले में तीव्र प्रतिक्रिया व्यक्त की। आखिरकार दोनों पक्षों को बिठाया गया उनसे गलती के लिए माफी मंगवाई गई और आपस में समझौता कर पूरे मामले को शांत करवा दिया गया। पिछले काफी समय से यह बात सामने आने लगी थी कि आईजीएमसी के डाक्टर मरीजों के साथ अच्छा व्यवहार नहीं करते हैं।          जारी...

 

सोलन समाचार

 

हिमाचल समाचार

नालागढ़ में विस्‍फोट

अब बघाट बैंक वसूली राजनैतिक मामला बन गया

कितने वर्ष चलेगा सोलन नगर में अतिक्रमण हटाओ अभियान

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मानवीय व्‍यवहार के लिए डाक्‍टरों को ट्रेनिंग

दो माह की चीनी एक साथ मिलेगी राशन डिपुओं में

ई-टैक्‍सी की ओर सरकार

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गणमान्‍यों की ओर से नव वर्ष 2026 की शुभकामनाएं

सोलन (हिमाचल प्रदेश)

 

 

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