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भारत के संविधान पर बात करना पाप हो गया है भारत में

भारत का चुनाव आयोग पूरे तंत्र को सड़ा रहा है...

     ऐसा महसूस होने लगा है कि भारत के संविधान पर बात करना भारत वर्ष में ही पाप हो गया है। हलांकि भारत के संविधान को चारों ओर से सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी भारत के संविधान में ही सबसे पहले भारत के राष्ट्रपति को उसकी शपथ में ही दी गई है। उसके बाद सुप्रीम कोर्ट को भारत के संविधान का संरक्षक बनाया गया है। फिर तंत्र में कार्य कर रही संसद और राज्य विधानसभाएं भी भारत के संविधान को मजबूत करने के लिए अपने कार्य करती है। लेकिन जिस प्रकार की खबरें भारत वर्ष से आ रही हैं उसे देखकर तो लगने लगा है कि भारत में ही भारत के संविधान की सुरक्षा की बात करना कोई पाप या गुनाह हो गया है।
     भारत का संविधान, भारत का गणतंत्र या लोकतंत्र हम भारत के लोगों से शुरू होता है। इसके लिए संविधान में यह व्यवस्था दी गई है कि देश के नागरिक को वोट डालने का अधिकार होगा और वह अपने मत से लोकसभा का गठन करेगा, जिसमें से भारत सरकार का जन्म होगा। इसी प्रकार वोटर अपने वोट कर इस्तेमाल करके राज्य विधानसभाओं का गठन करेगा। इसके लिए भारत के संविधान ने भारत के चुनाव आयोग का गठन किया। चुनाव आयोग को ही यह जिम्मेदारी दी गई कि वह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव देश भर में करवाएगा और जनमत से तैयार की गई सरकारों का गठन भी करवाएगा।
     पिछले दिनों जिस प्रकार के आरोप भारत के चुनाव आयोग पर लगे है। उसे देखकर ही कहा जा सकता है कि चुनाव आयोग ने ही भारत के लोकतंत्र में सड़ांद पैदा करने का कार्य शुरू कर दिया है। जिस चुनाव आयोग की प्रथम पंक्ति में खड़े बीएलओज को ही इस लोकतंत्र से परेशान होकर आत्महत्या करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा हो उस लोकतंत्र की दुर्दशा का अंदाजा सहजता से लगाया जा सकता है। यह बीएलओज ही देशवासियों के घर घर जाकर मतदाता सूची तैयार करते हैं। इन्हीं के जरिए देश के नागरिक लोकतंत्र में ईमानदारी से अपने वोट डालने के धर्म को पूरा करते हैं। उन्हीं पर न जाने कैसा दबाव है कि वह अपने कार्य को संविधान के अनुरूप नहीं कर पा रहे हैं। इसीलिए भारतीय निर्वाचन आयुक्तों को आज चोर कहा जाने लगा है।
     देश के बड़े बड़े नेता चुनाव आयोग पर वोट चोरी करने के आरोप लगा रहे हैं। क्योंकि चुनाव आयोग देशवासियों के करोड़ों वोट काट रहा है और अपनी पसंद से मतदाता सूची बनवा रहा है। वह किसी भी जिम्मेदार बड़े नेता द्वारा लगाए आरोपों का जवाब ईमानदारी से नहीं दे रहा है और अपने शक्तियों को इम्तेमाल करने की दुहाई देकर यह तय करने पर उतारू हो गया है कि भारत का नागरिक कौन है और कौन सरकार के गठन के लिए अपने वोट देकर लोकतंत्र को आगे घसीटने का कार्य करेगा। ऐसा करके वह करोड़ों लोगों को वोट डालने से वंचित करने लगा है और कोरोड़ों लोग उसने ऐसे छोड़ दिए हैं जो भारत में तो रहेंगे और अपने नागरिक अधिकारों को इस्तेमाल भी करेंगे लेकिन सरकार के गठन में उनकी कोई भूमिका नहीं होगी।
     यह बात भी अब किसी से छुपी हुई नहीं रह गई है कि वह ऐसे लोगों के हाथों की कठपुतलि बन गया है जो एक बार सत्ता में आने के बाद सत्ता से बाहर जाना ही नहीं चाहते हैं। इसके लिए वह सब कुछ कर गुजरने को तैयार हैं। उन्होंने इस मकसद के लिए तंत्र की हर शक्तिशाली संस्था को अपने कब्जे में ले लिया है। क्योंकि उन संस्थाओं के गठन में भारत सरकार की महत्वपूर्ण संवैधानिक भूमिका है। कहा तो यह भी जा रहा है कि चुनाव आयोग भी उसी शक्तिशाली संस्था में से एक है। चुनाव आयोग को ही इसके लिए सबसे बड़ा जिम्मेदार इसीलिए माना जा रहा है क्योंकि यह नागरिक के वोट के अधिकार को सुरक्षित रखता है और उसी वोट के अधिकार से संवैधानिक मशीनरी तैयार की जाती है। जब चुनाव आयोग शुरू में ही लोकतंत्र को सड़ा हुआ बना देगा तो पूरा तंत्र ही सड़ जाएगा। इसके लिए जिस बल का प्रयोग किया जा रहा है भय उसी का है।

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