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ग्रास साप्ताहिक, निर्मल निवास, सपरून, सोलन
(हि.प्र.)
न.-9418104770 |
नालागढ़ में
विस्फोट
विशेष
संवाददाता
सोलन
:
नव वर्ष के पहली सुबह नालागढ़ से मिली खबर के अनुसार यहां पुलिस थाने के
बाहर जोरदार विस्फोट हुआ। हलांकि इसमें किसी के हताहत होने और भारी नुक्सान
होने की कोई खबर नहीं है। लेकिन इस विस्फोट से इलाके में दहशत का माहौल है। यह
विस्फोट किसने और क्यूं किया इस पर कोई सुराग पुलिस के हाथ नहीं लगा है।
नव की सुबह नौ बजे के करीब नालागढ़ के पुलिस थाने के समीप एक जबरदस्त विस्फोट
हुआ। जिससे यहां के भवनों के कांच भी टूट गए। यह समय लोगों के ट्यूटी पर जाने
का रहता है। विस्फोट की गूंज बहुत दूर तक सुनाई दी। पुलिस ने तुरंत घटना स्थल
को घेर लिया और अपनी जांच में जुट गई। प्रारंभिक अंदेशे के अनुसार हो सकता है
यह कबाड़ा में रखी किसी विस्फोटक सामग्री की वजह से विस्फोट हो गया हो। लेकिन
सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है। क्षेत्र के सीसीटीवी कैमरे खंगाले जा रहे
हैं।
पुलिस अधीक्षक विनोद धीमान ने इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि
इस एंगल से भी जांच की जा रही है कि कहीं किसी शरारती तत्व ने इस विस्फोट की
घटना को अंजाम न दिया हो। इसके लिए सीसीटीवी कैमरे खंगाले जा रहे हैं लोगों से
इस घटना के बारे में पूछा जा रहा है। फारेंसिक लैब से घटना स्थल के सैंपल लिया
गए हैं। सारी जानकारी सामने आने के बाद ही पूरी स्थिति को स्पष्ट किया जा
सकेगा। पुलिस का कहना है कि लोगों को इस घटना को लेकर डरने की जरूरत नहीं है।
पुलिस हर पहलु पर नजर रखे हुए है।
सोलन जिला का नालागढ़ क्षेत्र हिमाचल का बार्डर एरिया है। वैसे भी नालागढ़ में
बाहरी लोगों का आवागमन काफी तेज रहता है। लोगों को इस बात की चिंता सता रही है
कि कहीं पुलिस थाने के बाहर विस्फोट करके लोगों में भय का माहौल बनाने का
प्रयास तो नहीं किया गया होगा। इस पर बाजार में कई तरह की अफवाहें भी जन्म ले
रही हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि विस्फोट होने के कारणों का अभी तक खुलासा
नहीं हो पाया है। यदि यह किसी कबाड़ के ढेर में हुआ विस्फोट ही है तो मामला
कबाड़ियों को चेतावनी देकर खत्म हो जाएगा और यदि किसी शरारती तत्व ने यह विस्फोट
किया है तो उसका पकड़ा जाना बहुत जरूरी है। पुलिस ने क्षेत्र के कबाड़ियों को
पहले ही चेतावनी जारी की हुई है।
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अब बघाट बैंक वसूली राजनैतिक मामला बन गया
भाजपा सरकार के खिलाफ मैदान में उतरी...
निजी
संवाददाता
सोलन :
बघाट बैंक कर्ज वसूली मामला अब पूरी तरह से
राजनैतिक मामला बन गया है। हलांकि बैंक पर लगी पाबंदियों के बीच प्रबंधन
डिफाल्टरों से कर्ज वसूली के लिए अपने तरीके से प्रयास कर रहा है। उसे इसमें
कितनी सफलता मिल रही है इसके बारे में समय समय पर रिपोर्ट जारी की जा रही है।
लेकिन अब यह राजनैतिक मामला भी बन गया है।
इस मामले को लेकर प्रदेश भाजपा के बड़े बड़े नेता विशेष रूप
से सोलन आने लगे हैं और प्रदेश सरकार पर राजनैतिक हमले कर रहे हैं। पिछले दिनों
भाजपा के नेता राजेन्द्र राणा ने भी सोलन आकर एक पत्रकार वार्ता प्रदेश सरकार
के खिलाफ की। इससे पहले भाजपा के स्थानीय नेताओं ने भी बैंक के बाहर प्रदर्शन
किया। कहा जा सकता है कि भाजपा अब इस मामले को राजनैतिक रंग देने के प्रयास में
है।
इससे पहले बघाट बैंक के निवेशकों ने एक समूह बनाकर पूर्व
मंत्री महेन्द्र नाथ सोफत के नेतृत्व में बैंक प्रबंधन के खिलाफ प्रदर्शन किया
और बघाट बैंक में निवेशकों के हितों के लिए मांग उठाई। कहते हैं श्री सोफत के
पैसे भी बघाट बैंक के पास फंसे हुए हैं। उन्होंने बार बार कहा कि यह निवेशकों
का आंदोलन है और वह इसकी लड़ाई कोर्ट जाकर भी लड़ेंगे। लेकिन अब यह मामला पूरी
तरह से राजनैतिक हो गया है।
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कितने वर्ष चलेगा सोलन नगर में अतिक्रमण हटाओ अभियान
कोई अवमानना की कार्यवाही हुई, किसी को कुछ पता नहीं
निजी संवाददाता
सोलन : आजकल प्रशासन
की टीम फिर से नगर की सड़कों पर से अतिक्रमण हटाने निकल पड़ी है। पिछले तीन
चार वर्षों पहले शुरू हुआ यह अतिक्रमण अभियान कितने वर्ष और चलेगा किसी को
कुछ पता नहीं है। इस अभियान में किस स्थान से प्रशासन ने अतिक्रमण को हटवा
दिया है और किस स्थान पर अतिक्रमण फिर से हो गया इसकी कोई सूचना अभी तक
जारी नहीं की गई है।
पिछले कई वर्षों में माल रोड, राजगढ़ रोड, सपरून बाईपास,
सर्कुलर रोड, शामती, द्योंघाट, अप्पर बाजार, लोअर बाजार, लक्कड़ बाजार,
शिल्ली रोड, जौणाजी रोड, बाईपास, चम्बाघाट, ब्रूरी और अन्य स्थानों पर से
अतिक्रमण को हटाया जा रहा है। हर बार नया एसडीएम सोलन नगर का अतिक्रमण
हटाने में लग जाता है। हर बार कहा जाता है कि माननीय हाई कोर्ट के आदेश पर
नगर के बाजारों से अवैध अतिक्रमण हटाया जा रहा है। जाहिर है यदि हाई कोर्ट
ने सोलन से अतिक्रमण हटाने का कोई आदेश दिया है तो अतिक्रमण हटाने के बाद
उसकी कम्प्लाएस रिपोर्ट भी कोर्ट को भेजी जाती होगी। उसमें क्या लिखा जाता
है यह भी प्रशासन को पता होगा।
अब यहां प्रश्न यह उठता है कि यदि एक बार अतिक्रमण हटा
दिए जाने के बाद कोई फिर से वहां अतिक्रमण कर लेता है तो यह सीधे रूप से
हाई कोर्ट के आदेश की अवमानना का मामला बनता है। जिला प्रशासन या अतिक्रमण
हटाने गई टीम ने यह जानकारी किसी को नहीं दी कि कितने लोगों ने एक बार
अतिक्रमण हटा दिए जाने के बाद फिर से अतिक्रमण कर लिया और उसके खिलाफ हाई
कोर्ट में अवमानना की कार्यवाही शुरू कर दी गई है।
यह बात भी समझ से परे है कि प्रदेश हाई कोर्ट ने ऐसा कैसा
आदेश कौन सी तारीख को पारित कर दिया है जिसकी समय अवधि अनिश्चित काल के लिए
तय कर दी गई है। हाई कोर्ट ने विभिन्न मामलों में सरकारी भूमि पर से अवैध
कब्जे हटाने के लिए कहा है। हलांकि सेब के बागानों पर से कब्जे हटाने के
आदेश पर सुप्रीम कोर्ट से रोक लगा दी है। हाई कोर्ट का नाम लेकर जिला
प्रशासन कब तक इस खेल को जारी रखेगा, किसी को कुछ पता नहीं है। यहां यह बात
भी गौर करने लायक है कि प्रशासन की यह जिम्मेदारी है कि वह सरकारी जमीन पर
कब्जे न होने दे लेकिन यह बात कभी सामने नहीं आई कि किसी ने सरकारी भूमि पर
मकान बना लिया और उसे ढाह दिया गया।
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