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हिमाचल समाचार

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मानवीय व्‍यवहार के लिए डाक्‍टरों को ट्रेनिंग

सुक्‍खू ने डाक्‍टरों व कर्मचारियों की सुरक्षा पर भी कहा...

निजी संवाददाता

     शिमला : इंदिरा गांधी मेडिकल कालेज (आईजीएमसी) मार कुटाई प्रकरण के बाद ही यह बाद कही जाने लगी थी कि मानवीय व्यवहार के लिए डाक्टरों को एक अलग से टेªनिंग दिए जाने की आवश्यकता है। ताकि नागरिकों के साथ अस्पताल में सम्मानजनक व्यवहार के संवैधानिक दायित्व को सुरक्षित रखा जा सके। मुख्यमंत्री सुखविन्दर सिंह सुक्खू ने इस बात को गंभीरता से लेते हुए यह बात मान ली है।
     आईजीएमसी शिमला में डाक्टर व मरीज मारपीट का मामला अब लगभग सुलझ गया है। इसके तुरंत बाद मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि डाक्टरों के लिए मानव व्यवहार व भीड़ प्रबंधन (ह्यूमन बिहेवियर और मैन-मैनेजमेंट) कोर्स अनिवार्य किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग की उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार डाक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। इसका मतलब यह नहीं कि मरीजों के सम्मान और अधिकारों की अनदेखी की जाए। उन्होंने कहा कि डाक्टरों का मरीजों के प्रति व्यवहार भविष्य में उनकी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) का भी हिस्सा बनाया जा सकता है। सीएम ने कहा- डाक्टरों की भावनाओं को ध्यान में रखकर प्रदेश सरकार आगे भी जनहित में फैसला लेगी।

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दो माह की चीनी एक साथ मिलेगी राशन डिपुओं में

सर्दियों में चीनी की खप्‍त भी बढ़ जाती है...

निजी संवाददाता

     शिमला : चीनी की सप्लाई में व्यवधान पैदा हो जाने के कारण लोगों को पिछले माह चीनी नहीं मिल पाई थी। लेकिन अब सरकार ने व्यवस्था दी है कि शिमला शहरवासियों को नए साल पर डिपुओं में चीनी मिलनी शुरू हो जाएगी। लोगों को दिसंबर और जनवरी की चीनी एक साथ दे दी जाएगी।
     लगातार बढ़ती महंगाई के बीच लोगों को अब बाजारों से ऊंची कीमतों में चीनी की खरीदारी नहीं करनी पड़ेगी। यह भी सभी जानते हैं कि सर्दियों में पहाड़ के घरों में चीनी की उपयोगिता बहुत बढ़ जाती है। सर्दियों में लोग चाय भी खाूब पीते हैं। साथ ही मिष्ठान आदि बनाने के लिए भी सर्दी का मौसम सबसे अच्छा माना जाता है। राशन डिपुओं में दिसंबर और जनवरी का चीनी का कोटा लोगों को उपलब्ध करवाया जाएगा। इससे लोगों को चीनी के उपयोग की समस्या से कुछ राहत जरूर मिलेगी। इससे शहर के हजारों राशनकार्ड उपभोक्ताओं को सीधा लाभ होगा।
     राजधानी में डिपुओं की तुलना में खुले बाजारों में चीनी लोगों को महंगे दामों पर मिल रही है। लोगों को पिछले कई महीनों से 55 रुपए तक चीनी की खरीदारी करनी पड़ रही है। ऐसे में आम परिवारों का बजट गड़बड़ा गया है। क्योंकि एक परिवार में चार पांच किलो चीनी महीने में लग जाना एक आम बात है। राशन डिपो में आए लोग आए दिन यही पूछते हैं कि कब चीनी का कोटा आएगा। शहर में 40 से अधिक राशन के डिपो हैं। इन डिपुओं से आटा, चावल, नमक, तेल और दालों की हर माह करीब 25 हजार राशन कार्ड धारक खरीदारी करते हैं लेकिन चीनी न होने के कारण लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। हालांकि विभाग का दावा है कि नए साल पर लोगों को चीनी मिलेगी। दिसंबर और जनवरी का कोटा एकसाथ लोगों को दिया जाएगा। इसको लेकर आर्डर भी जा चुका है। ऐसे में जल्द चीनी गोदामों में पहुंच जाएगी।
     विभागीय सूत्रों का कहना है कि पहले जब चीनी मंगवाई थी तो इसकी क्वालिटी को लेकर समस्या पेश आ गई थी। इस कारण इसे वापस करवाया गया। हालांकि नवंबर के आधे महीने तक तो सप्लाई दी गई, लेकिन इसके बाद दिसंबर बीतने तक सप्लाई नहीं आई है। यही कारण है कि लोगों के लिए यह एक समस्या बनी हुई है।

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ई-टैक्‍सी की ओर सरकार

निजी संवाददाता

     शिमला : प्रदेश में पर्यावरण अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने और स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने के लिए डीजल व पेट्रोल से चलने वाली 1000 टैक्सियों को ई-टैक्सी में परिवर्तित करने पर प्रदेश सरकार 40 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान करेगी।
     अधिसूचना के अनुसार डीजल और पेट्रोल से चलने वाली 1000 टैक्सियों को ई-टैक्सी में परिवर्तित करने पर 40 प्रतिशत सब्सिडी राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्ट-अप योजना (आरजीएसएसवाई)-2023 के तहत दी जाएगी।
     सरकार प्रति ई-टैक्सी 40 प्रतिशत तक की सब्सिडी उपलब्ध करवाई जाएगी, जिससे टैक्सी संचालकों को इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर स्थानांतरित होने में आर्थिक सहायता मिलेगी। साथ ही डीजल व पेट्रोल टैक्सियों को ई-टैक्सी में बदलने की शर्तें, सब्सिडी के लिए पात्रता मापदंड और आवेदन प्रक्रिया अधिसूचित की जाएगी।

 
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