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भारतीय लोकतंत्र बचाने की चिंता

न्‍यूयार्क टाइम्‍स में छपी रिपोर्ट से चिंता बढ़ी...

विशेष संवाददाता

     शिमला : ‘न्यूयार्क टाइम्स’ में छपी रिपोर्ट के बाद दुनियां भर में भारतीय लोकतंत्र को बचाने की चिंता हो गई है। इस अंतरराष्ट्रीय अखबार के पहले पन्ने पर छपी रिपोर्ट में जो कहा गया है वह भारत के ही नहीं, दुनियां भर के लोकतांत्रिक राष्ट्रों के लिए प्रश्न खड़ा कर रही है।
     इस रिपोर्ट में प्रमुख बात यह लिखी गई है कि अब यदि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पद से हट भी जाते हैं तो भी भारतीय लोकतंत्र की दशा सुधरने वाली नहीं है। आरएसएस और नरेन्द्र मोदी ने पूरे तंत्र पर इस प्रकार कब्जा कर लिया है कि अब भारत इससे छूट नहीं सकता है। इस रिपोर्ट को भारत में भी लाखों लोगों ने पढ़ा है और इसे लेकर एक जबरदस्त बहस भी देश भर में छिड़ गई है।
     इस रिपोर्ट को भारत में देशवासियों की आंखें खोलने वाला बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि आरएसएस भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने के सपने को पूरा करने के लिए आगे बढ़ गई है। उसने अपने संगठन के जरिए पूरे तंत्र पर कब्जा जमा लिया है।
     इस रिपोर्ट में जहां उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रधानमंत्री बनने का भी जिक्र है वहीं देश की विपक्षी पार्टियों को काफी कमजोर बताया गया है जो मौजूदा संकट में कुछ करने में सक्षम नहीं है। इसके अतिरिक्त इसमें काफी विस्तार से भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था का बखान किया गया है।
     न्यूयार्क टाइम्स की इस रिपोर्ट के बाद भारत को लेकर विश्व भर में चरचाएं गरम हैं। देखना यह है कि भारत में आने वाले कुछ सालों में परिस्थितियां बदलेंगी या फिर भारत पूरी तरह से हिन्दू राष्ट्र धर्मसापेक्ष राष्ट्र के रूप में विश्व के मानचित्र पर आ जाएगा। इसके बाद दुनियां भर के देश भारत को किस नजरिए से लेंगे यह बात भी भविष्य के गर्भ में छुपी हैं। रिपोर्ट में जिस प्रकार से अन्य धर्मों के साथ खास तौर पर मुसलमानों और ईसाइयों के साथ भेदभाव के बारे में लिखा गया है वह दुनियां भर के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। यदि हालात ऐसे ही बने रहे तो जाहिर है मुस्लिम और इसाइयों के देशों में भारत को अपनी पैठ बनाने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। जहां तक भारत का सवाल है लोकतंत्र के पक्ष में खड़ी ताकतें भी इस रिपोर्ट को गंभीरता से ले रही हैं।।

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