|
संपादकीय
आखिर लोग जिंदा कैसे रहेंगे
भारतीय
लोकतंत्र की बात करने के अब कोई मायने नहीं रह गए हैं। अब तो सबसे बड़ा प्रश्न
यह खड़ा हो गया है कि भारत में अब लोग जिंदा कैसे रहेंगे। महंगाई काबू से बाहर
होती जा रही है। नौकरियों के लिए युवा प्रदर्शन करने पर आमादा हैं। डीजल
पैट्रोल के दाम दिन प्रतिदिन बढ़ रहे हैं। लाखों रुपए खर्च कर परीक्षाएं देने
के बाद पेपर लीक हो रहे हैं। नागरिक सुरक्षा की कोई गारंटी अब बची नहीं है।
तंत्र के किसी कोने से यह आवाज नहीं आ रही है कि नागरिकों को किसी प्रकार का
सुकून मिल सके। पूरा तंत्र समझौतावादी हो चुका है। बावजूद इसके सत्तारूढ़ दल
चुनाव पर चुनाव जीतता चला जा रहा है।
भारत वर्ष में इस असमंजस की स्थिति में लोग यह सोचने पर मजबूर हो गए हैं कि
आखिर वह आने वाले समय में जिंदा कैसे रहेंगे। देश में उनकी कमाई का कोई जरिया
बचेगा भी या नहीं। पढ़े लिखे युवा जिस प्रकार से देश से पलायन करने पर मजबूर
हैं यह स्थिति उनके लिए भी काफी गंभीर है। जिन देशों में भारत के युवा नौकरियां
करने जाते रहे हैं वहां भी सरकारें भारत के लोगों के घुसने पर पाबंदियां लगाती
जा रही हैं। इससे एक बात और घटित हो रही है कि काबिल लोग भारत को छोड़ने में
तनिक भी संकोच नहीं करेंगे। ऐसे में काबिल लोगों के अभाव में देश को कैसे लोग
चलाएंगे इसका अंदाजा कोई भी सहजता से लगा सकता है।
जो लोग देश के बारे में चिंता करने वाले हैं उनकी बातें भी बेअसर साबित होती जा
रही हैं। जाहिर है यह आवाजें भी आने वाले समय में दबती चली जाएंगी। देश इतने
संकट में पहुंच जाएगा कि लोग सिर्फ अपनी चिंता करेंगे और बाकि सभी बातों के कोई
मायने नहीं रह जाएंगे। यह बातें इस ओर साफ इशारा कर रही हैं कि क्या देश में
कुछ अनिष्ठ होने वाला है। हालत ऐसे हैं कि यदि लोग आक्रामक हो जाएंगे तो भी
मारे जाएंगे और यदि शांत रहेंगे तो भी मारे जाएंगे। इन हालातों में देश की
चिंता करने वाले लोग क्या रास्ता बताते हैं इस पर पूरे देश की निगाहें हैं। कुछ
लोग कहते हैं कि चुनाव सुधार के जरिए देश को संभाला जा सकता है। कुछ कहते हैं
कि देश में बड़ी क्रांति के बाद ही नई राजनीति जन्म लेगी।
अभी देश के युवाओं ने अपनी मांगों को लेकर धारना प्रदर्शन किया तो लोगों ने यह
आवाज उठानी शुरू कर दी कि क्या भारत में भी श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल की
तरह क्रांति आने वाली है। कहते हैं मौजूदा सत्तारूढ़ दल भी इस बात से चिंतित है
कि कहीं देश के युवाओं का गुस्सा उपरोक्त देशों की तरह उन पर भी न टूट पड़े।
इसकी सबसे बड़ी वजह यही है कि देश असुरक्षा की ओर आगे बढ़ रहा है और अधािकतर
लोग अब सरकार से अपेक्षाएं छोड़ चुके हैं। भारत सरकार के समक्ष हर प्रकार की
स्थिति की जानकारी है। यदि सरकार चाहे तो लोगों में मन में व्याप्त भय को दूर
कर सकती है। इसके लिए उसे लोगों को विश्वास में लेना होगा और इस बात की गारंटी
देनी होगी कि देश के हर नागरिक की परेशानी हल करने के लिए सरकार ने क्या हल
दिया है और वह दिखने भी लगे। |