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प्रियंका गांधी ने हिमाचल के सांसदों को पीछे छोड़, फोरलेन को छेड़ा

प्रियंका के सवाल पर हिमाचल के सांसदों को सांप सूंघ गया

विशेष संवाददाता

     शिमला : परवाणू से शिमला जाने वाले फोरलेन से सोलन के लोग कई वर्षों से जूझ रहे हैं। इसका ज्यादा हिस्सा सोलन जिला से ही गुजरता है। अब प्रियंका गांधी ने हिमाचल के सभी सांसदों को पीछे छोड़ते हुए शिमला को देश के दूसरे राज्यों से जोड़ने वाले चंडीगढ़-शिमला फोरलेन का मामला संसद में छेड़ दिया। यह मामला हिमाचल के किसी सांसद ने नहीं बल्कि केरल के वायनाड से सांसद एवं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने लोकसभा में इस राष्ट्रीय राजमार्ग की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताई।
     प्रियंका गांधी ने कहा कि चंडीगढ़-शिमला फोरलेन के कई हिस्सों में रिटेनिंग वॉल (सुरक्षा दीवारें) बेहद कम ऊंचाई की बनाई जा रही हैं, जिसके कारण इन स्थानों पर लैंडस्लाइड की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। प्रियंका के इस सवाल से लोकसभा में हिमाचल के चारों सांसदों को सांप सूंघ गया और वह कुछ नहीं बोल सके। शिमला के सांसद सुरेश कश्यप तो दिन रात इस मार्ग पर अपनी गाड़ी दौड़ाते चले आ रहे हैं। उन्होंने भी कभी इस ओर सड़क परिवहन मंत्री का ध्यान नहीं दिलाया। जबकि प्रियंका गांधी ने इस ओर केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों का ध्यान आकर्षित करते हुए तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग लोकसभा में कर दी।
     प्रियंका ने सदन में मौजूद मंत्री नितिन गडकरी से अप्वाइंटमेंट की मांग भी कर डाली। इस पर गडकरी की तरफ से भी तुरंत जवाब दिया गया कि आप कभी भी मिलने आ जाइए। आपको अप्वाइंटमेंट लेने की जरूरत नहीं है। इसके बाद प्रश्नकाल खत्म होते ही प्रियंका ने गडकरी से मुलाकात की और अपने संसदीय क्षेत्र वायनाड की सड़कों पर भी चर्चा की। मुलाकात के दौरान गडकरी ने प्रियंका गांधी को चावल से बनी डिश भी खिलाई। इस दौरान गडकरी ने मजाकिया लहजे में कहा कि भाई का काम कर दिया है तो बहन का काम क्यों नहीं करेंगे। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही राहुल गांधी ने भी रायबरेली की सड़कों को लेकर गडकरी से मुलाकात की थी।
     अब हिमाचल में यह बात गूंजने लगी है कि हिमाचल के सांसद इतने सालों से संसद में बैठे क्या कर रहे हैं जबकि उनकी ही पार्टी के मंत्री भाजपा तो क्या कांग्रेस के लोगों के काम भी आसानी से कर रहे हैं। कहीं सांसदों में मोदी खौफ तो नहीं है। यदि ऐसा नहीं है तो उन्हें जनहित के मुद्दे संसद में उठाने चाहिए।

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